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‘बिल्ली’ से ‘शिकारी’ तक: K-pop समूह MEOVV की वापसी क्यों सिर्फ एक कमबैक नहीं, बल्कि पहचान बदलने की रणनीति है

‘बिल्ली’ से ‘शिकारी’ तक: K-pop समूह MEOVV की वापसी क्यों सिर्फ एक कमबैक नहीं, बल्कि पहचान बदलने की रणनीति है

कोरिया के पॉप मंच पर एक नया मोड़

दक्षिण कोरिया के तेज़-रफ्तार K-pop उद्योग में किसी समूह का हर कमबैक केवल नया गाना जारी करने भर की घटना नहीं होता, बल्कि वह एक तरह की सार्वजनिक परीक्षा भी होता है। कौन-सा समूह अपनी पुरानी छवि से आगे बढ़ रहा है, किसने अपने संगीत की दिशा बदली, किसने मंचीय व्यक्तित्व को और धार दी—इन सवालों के जवाब अक्सर एक एल्बम, एक शोकेस और एक शीर्षक गीत में समा जाते हैं। इसी संदर्भ में उभरते K-pop समूह MEOVV ने अपने दूसरे मिनी एल्बम ‘बाइट नाउ’ के साथ जो संदेश दिया है, वह ध्यान खींचने वाला है। सियोल के मापो-गु स्थित सांगाम इलाके के क्यूब कन्वेंशन सेंटर में आयोजित शोकेस में समूह ने अपनी नई पहचान को एक बेहद संक्षिप्त लेकिन असरदार वाक्य में रखा—“हम बिल्ली से शिकारी जीव में विकसित हुए हैं।”

भारतीय पाठकों के लिए यह पंक्ति महज एक स्टाइलिश बयान नहीं, बल्कि ब्रांडिंग और कलात्मक दिशा का साफ संकेत है। अगर हम इसकी तुलना हिंदी फिल्म संगीत या भारतीय पॉप संस्कृति से करें, तो यह वैसा ही है जैसे कोई कलाकार अपनी ‘क्यूट’ या ‘रोमांटिक’ छवि छोड़कर अचानक अधिक आक्रामक, अधिक आत्मविश्वासी और अधिक मंच-केन्द्रित व्यक्तित्व के साथ लौटे। बॉलीवुड में कई सितारों ने अपने करियर के अलग-अलग चरणों में ऐसी छवि-परिवर्तन रणनीति अपनाई है—मासूमियत से तीखेपन तक, हल्के मनोरंजन से गहरे प्रभाव तक। MEOVV का नया कमबैक भी कुछ वैसा ही लगता है, फर्क सिर्फ इतना है कि K-pop में यह परिवर्तन और भी अधिक योजनाबद्ध, दृश्यात्मक और संगीतात्मक होता है।

समूह के नाम से ही ‘बिल्ली’ जैसी छवि उभरती है—चपल, रहस्यमय, आकर्षक और थोड़ी चंचल। लेकिन MEOVV अब इस प्रतीक को वहीं रोकना नहीं चाहता। वह इसे ‘wildness’, यानी जंगली ऊर्जा, शिकारी आत्मविश्वास और मंचीय दबदबे तक ले जाना चाहता है। K-pop में यह बदलाव बहुत मायने रखता है, क्योंकि वहां किसी समूह की पहचान केवल गाने से नहीं, बल्कि उसके संपूर्ण ‘कंसेप्ट’ से बनती है। ‘कंसेप्ट’ K-pop संस्कृति का एक अहम शब्द है, जिसे भारतीय पाठकों के लिए सरल भाषा में समझें तो यह किसी कलाकार की उस समेकित रचनात्मक छवि को कहते हैं जिसमें संगीत, वेशभूषा, कोरियोग्राफी, मेकअप, वीडियो, मंच-सज्जा और सार्वजनिक बयान—सब कुछ एक ही विचारधारा के अनुरूप चलता है।

MEOVV का यह नया दौर इसीलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि समूह ने खुद ही अपनी पहचान के बदलाव को शब्द दिया है। K-pop के शोरगुल वाले बाजार में यह स्पष्टता अक्सर बहुत काम करती है। जब दर्जनों समूह लगातार नए गीत और वीडियो ला रहे हों, तब दर्शक सबसे पहले यही पूछते हैं—इस बार नया क्या है? MEOVV ने उस प्रश्न का उत्तर बहुत संक्षेप में, पर बहुत सोची-समझी शैली में दिया है।

आठ महीने का अंतराल: K-pop में यह विराम कितना महत्वपूर्ण है

MEOVV की यह वापसी पिछले साल अक्टूबर में आए डिजिटल सिंगल ‘बर्निंग अप’ के लगभग आठ महीने बाद हो रही है। सुनने में आठ महीने बहुत लंबा समय न लगे, लेकिन K-pop की दुनिया में यह अंतराल छोटा नहीं माना जाता। यहां कंटेंट का चक्र बहुत तेज चलता है—गाने, डांस प्रैक्टिस वीडियो, परफॉर्मेंस क्लिप, रियलिटी कंटेंट, लाइव प्रसारण, फैन-इंटरैक्शन, सोशल मीडिया अपडेट—सब कुछ लगभग निरंतर चलता रहता है। ऐसे माहौल में यदि कोई समूह आठ महीने बाद लौटता है, तो उस वापसी से अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं।

भारत में भी अब K-pop फैन समुदाय काफी सक्रिय है, खासकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में। यहां के युवा श्रोताओं ने यह समझ लिया है कि K-pop में ‘कमबैक’ का मतलब सिर्फ पुराने कलाकार का लौटना नहीं, बल्कि एक नई रचनात्मक पैकेजिंग के साथ प्रवेश करना है। यही कारण है कि जब किसी समूह की वापसी में अंतराल आता है, तो प्रशंसक उस अवधि को ‘तैयारी का समय’ मानते हैं। वे उम्मीद करते हैं कि संगीत, मंच, फैशन और दृश्य-भाषा—सब कुछ पहले से अधिक ठोस होगा।

शोकेस में समूह की सदस्य गवॉन ने इस एल्बम को लेकर कहा कि इसे उन्होंने “जान लगा कर, तीव्र संकल्प के साथ” तैयार किया है। K-pop में कलाकारों के ऐसे वक्तव्य सामान्य प्रचार पंक्तियों की तरह सुनाई दे सकते हैं, लेकिन वे अक्सर इस बात का संकेत भी होते हैं कि समूह अपनी अगली चाल को निर्णायक मान रहा है। भारतीय संगीत उद्योग में भी किसी कलाकार की दूसरी या तीसरी बड़ी रिलीज़ अक्सर यह तय करती है कि वह केवल एक क्षणिक ट्रेंड है या लंबी दौड़ का नाम। MEOVV के लिए यह एल्बम उसी तरह की कसौटी लगता है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह एक मिनी एल्बम है, सिर्फ एकल गीत नहीं। K-pop में मिनी एल्बम को बहुत गंभीरता से देखा जाता है, क्योंकि वह किसी समूह को एक ट्रैक से आगे बढ़कर अपनी शैली का छोटा लेकिन ठोस ब्रह्मांड बनाने का अवसर देता है। भारतीय पाठक इसे किसी फिल्म के एक लोकप्रिय गीत और पूरी साउंडट्रैक एल्बम के बीच के अंतर की तरह समझ सकते हैं। एक हिट गाना ध्यान खींच सकता है, लेकिन कई ट्रैकों वाला एल्बम यह साबित करता है कि कलाकार के पास सौंदर्यबोध, विषय-विस्तार और संगीत-दृष्टि मौजूद है। MEOVV के लिए ‘बाइट नाउ’ ऐसा ही अवसर है—अपनी पहचान को एक व्यापक फ्रेम में स्थापित करने का।

‘DDI RO RI’: बाख से K-pop तक, क्लासिकल धुन का नया रूप

इस वापसी का सबसे दिलचस्प पक्ष उसका शीर्षक गीत ‘DDI RO RI’ है। यह ट्रैक जर्मन संगीतकार योहान सेबास्टियन बाख की प्रसिद्ध रचना ‘टोकाटा एंड फ्यूग इन डी माइनर’ से प्रेरित बताया गया है। भारतीय पाठकों के लिए यह बात विशेष रुचि की हो सकती है, क्योंकि हमारे यहां भी शास्त्रीय परंपराओं को लोकप्रिय संगीत में ढालने की एक लंबी परंपरा रही है। चाहे हिंदी फिल्मों में राग-आधारित धुनों का रूपांतरण हो, ए.आर. रहमान की संरचनात्मक प्रयोगशीलता हो, या स्वतंत्र संगीत में लोक और शास्त्रीय तत्वों की नई प्रस्तुति—हम जानते हैं कि एक परिचित विरासत को नए साउंड में बदलना कितना शक्तिशाली कलात्मक उपकरण हो सकता है।

MEOVV का शीर्षक गीत इसी विचार पर आधारित दिखता है। बाख की मूल रचना अपनी नाटकीयता, गहरे तनाव और विशालता के लिए जानी जाती है। यदि उस भाव-भूमि को K-pop के ढांचे में ढाला जाए, तो परिणाम स्वाभाविक रूप से रहस्य, तीव्रता और एक तरह के मंचीय नाट्य प्रभाव की ओर जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, गीत की शुरुआत से ही “DDI RO RI” जैसा दोहराव वाला हुक श्रोता का ध्यान खींचता है और कोरस में फिर लौटता है। K-pop की वैश्विक सफलता का एक बड़ा राज यही है कि वह अर्थ से पहले ध्वनि और स्मृति पर काम करता है। यानी शब्द का अनुवाद हर श्रोता नहीं समझेगा, लेकिन उसका उच्चारण, उसकी लय और उसकी प्रस्तुति श्रोता के मन में बैठ जाती है।

भारतीय पॉप संस्कृति में भी हमने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं जहां किसी गीत का एक शब्द, एक तुक या एक ध्वनि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बन जाती है। कई बार बोल का शाब्दिक अर्थ कम महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उसका ध्वन्यात्मक आकर्षण उसे लोकप्रिय बना देता है। ‘DDI RO RI’ के मामले में भी यही रणनीति दिखती है—एक ऐसा शीर्षक और हुक, जिसे वैश्विक दर्शक तुरंत पकड़ सकें। यह K-pop के उस फार्मूले का हिस्सा है जिसमें संगीत, दृश्य और नृत्य एक ‘याद रहने वाला क्षण’ बनाते हैं।

यहां एक सांस्कृतिक बात समझना जरूरी है। K-pop में ‘किलिंग पार्ट’ या ‘पॉइंट मूव’ जैसे शब्द प्रचलित हैं। ‘किलिंग पार्ट’ का मतलब होता है गीत या प्रस्तुति का वह छोटा हिस्सा जो सबसे अधिक याद रह जाए—चाहे वह एक हुक हो, एक नृत्य-चाल हो, एक चेहरे का भाव हो या कोई खास पंक्ति। MEOVV का यह नया गीत इसी तरह के श्रवणीय ‘किलिंग पार्ट’ पर आधारित लगता है। यही वजह है कि समूह इस गाने को सिर्फ एक ट्रैक के रूप में नहीं, बल्कि अपनी नई छवि के वाहक के रूप में पेश कर रहा है।

बाख जैसी ऐतिहासिक शास्त्रीय विरासत को K-pop में शामिल करना यह भी दर्शाता है कि समूह केवल तेज बीट्स और दृश्य आक्रमकता पर भरोसा नहीं कर रहा, बल्कि वह अपने संगीत को कुछ अतिरिक्त नाटकीय भार देना चाहता है। यदि मंच पर इसके साथ तीखी कोरियोग्राफी, गहरे भाव और सघन कैमरा-निर्देशन जोड़ा जाए, तो यह गीत लाइव प्रदर्शन में और भी प्रभावी हो सकता है। यही वह जगह है जहां K-pop अपने आप को सिर्फ ऑडियो नहीं, बल्कि पूर्ण दृश्य-श्रव्य अनुभव के रूप में स्थापित करता है।

टेडी की मौजूदगी और सदस्यों की भागीदारी: निर्माण और आत्म-अभिव्यक्ति का संतुलन

MEOVV के इस शीर्षक गीत में द ब्लैक लेबल के प्रमुख निर्माता टेडी की भागीदारी विशेष महत्व रखती है। K-pop से परिचित दर्शक जानते हैं कि टेडी का नाम केवल एक निर्माता का नाम नहीं, बल्कि एक निश्चित गुणवत्ता, आक्रामक पॉप संवेदना और बड़े पैमाने की सार्वजनिक अपील का संकेत भी माना जाता है। जिस तरह भारत में कुछ संगीतकार या निर्माता अपने नाम भर से श्रोताओं के बीच अपेक्षा पैदा कर देते हैं, उसी तरह कोरिया में भी कुछ नाम ब्रांड बन चुके हैं। टेडी उन्हीं में से एक हैं।

लेकिन इस कहानी का दूसरा पक्ष भी कम अहम नहीं है। गीत के लेखन में समूह की सदस्य नरीन, एला और गवॉन के नाम भी जुड़े हैं। यह K-pop की वर्तमान प्रवृत्ति के अनुरूप है, जहां केवल कंपनी-निर्मित छवि से आगे बढ़कर कलाकारों की रचनात्मक भागीदारी पर अधिक जोर दिया जा रहा है। भारतीय युवा श्रोता भी अब यह देखने लगे हैं कि कोई पॉप कलाकार अपने संगीत में कितना निजी निवेश करता है—क्या वह सिर्फ परफॉर्मर है या रचनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा भी है।

बेशक, केवल क्रेडिट देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किस सदस्य ने गीत में कितना योगदान दिया। फिर भी, किसी शीर्षक गीत में सदस्यों का लेखन-स्तर पर शामिल होना एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों अर्थों में महत्वपूर्ण है। प्रतीकात्मक इसलिए कि इससे समूह की ‘आवाज़’ केवल एजेंसी-निर्मित नहीं, बल्कि आंशिक रूप से स्वयं कलाकारों द्वारा आकारित लगती है। व्यावहारिक इसलिए कि प्रशंसक गीतों के भाव, मंच के हावभाव और सार्वजनिक व्यक्तित्व के बीच अधिक प्रामाणिक संबंध महसूस करते हैं।

भारतीय संदर्भ में इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे कोई अभिनेता सिर्फ पर्दे पर अभिनय न करे, बल्कि पटकथा, संवाद या संगीत-चयन में भी हाथ बंटाए। इससे दर्शकों की धारणा बदलती है। वे उस कलाकार को एक निष्पादक भर नहीं, बल्कि सर्जक के रूप में भी देखने लगते हैं। K-pop की दुनिया में यह बदलाव अभी बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि उद्योग पर लंबे समय से ‘पूरी तरह निर्मित’ छवियों का आरोप लगता रहा है। ऐसे में सदस्यीय भागीदारी समूह की विश्वसनीयता को मजबूत करती है।

MEOVV के लिए यह संयोजन—एक तरफ अनुभवी निर्माता टेडी, दूसरी ओर सदस्यों का गीत-लेखन—रणनीतिक रूप से उपयोगी है। इससे समूह यह संदेश देता है कि उसके पास पेशेवर, परखा हुआ ढांचा भी है और अपनी उभरती हुई कलात्मक आत्मा भी। नए या विकसित हो रहे समूहों के लिए यही संतुलन भविष्य की पहचान गढ़ने में निर्णायक हो सकता है।

शोकेस की भाषा: K-pop में आत्मविश्वास भी प्रदर्शन का हिस्सा होता है

कोरिया में एल्बम रिलीज़ से पहले या उसी दिन आयोजित ‘शोकेस’ एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रारूप है। भारतीय मनोरंजन उद्योग में इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस, ट्रेलर लॉन्च और लाइव परफॉर्मेंस के मिश्रण की तरह समझा जा सकता है। इसमें कलाकार मीडिया और प्रशंसकों के सामने नया काम पेश करते हैं, अपनी दिशा समझाते हैं और कई बार पहली बार मंच पर मुख्य गीत का प्रदर्शन भी करते हैं। K-pop में शोकेस इसलिए खास होता है क्योंकि यहां भाषा, हावभाव, फैशन और प्रस्तुति—सब मिलकर उस कमबैक का पहला आधिकारिक प्रभाव बनाते हैं।

MEOVV ने इस मंच का उपयोग केवल एल्बम की जानकारी देने के लिए नहीं, बल्कि अपनी महत्वाकांक्षा सार्वजनिक करने के लिए किया। गवॉन का यह कहना कि समूह ऐसा प्रभाव देना चाहता है जिसे देखकर लोग एक पल के लिए भी नजर न हटा सकें, कोई साधारण बयान नहीं है। यह K-pop के उस मूल सिद्धांत को छूता है जिसमें संगीत ‘दिखाया’ भी जाता है, केवल ‘सुनाया’ नहीं। यहां मंच पर प्रभुत्व, कैमरे के सामने भाव, कोरियोग्राफी की सटीकता और सामूहिक ऊर्जा—सभी की संयुक्त परीक्षा होती है।

समूह की सदस्य एला की प्रतिक्रिया भी दिलचस्प है। उन्होंने कहा कि ‘DDI RO RI’ वाला हिस्सा उन्हें पहले थोड़ा अजीब या चौंकाने वाला लगा, क्योंकि बचपन में वह धुन दोस्तों के साथ मज़ाक में गुनगुनाई जाती थी। इस टिप्पणी का महत्व केवल इतना नहीं कि गीत अलग है, बल्कि यह भी कि MEOVV ने परिचित और अपरिचित के बीच की रेखा को जानबूझकर चुना है। कोई ध्वनि जो पहले खेल या हास्य का हिस्सा रही हो, वही अब एक बड़े K-pop ट्रैक का केंद्रीय हुक बन जाती है। यह जोखिम है, लेकिन सही मंचन के साथ यही जोखिम पहचान बन सकता है।

भारत में भी लोकप्रिय संस्कृति ने कई बार ऐसे रूपांतरण देखे हैं जहां सड़क, लोक, बच्चों के खेल या पुरानी धुनों से आए तत्वों को नए संगीत में बदलकर नया जीवन दिया गया। अंतर बस इतना है कि K-pop इस प्रयोग को बेहद सुसंगठित दृश्य प्रस्तुति के साथ जोड़ देता है। MEOVV की रणनीति लगता है कि इसी दिशा में है—कुछ ऐसा पेश करना जो पहले क्षण में थोड़ा अनपेक्षित लगे, लेकिन बाद में उसी वजह से दिमाग में अटक जाए।

यही कारण है कि समूह का ‘बिल्ली से शिकारी’ वाला रूपक अधिक प्रभावी बनता है। यह केवल छवि परिवर्तन नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक बदलाव का बयान भी है—संकोच से आक्रामकता तक, सजावटी आकर्षण से नियंत्रित शक्ति तक, और साधारण ‘क्यूटनेस’ से मंचीय वर्चस्व तक। K-pop के प्रतिस्पर्धी संसार में यह मानसिक मुद्रा अक्सर उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितना गीत का वास्तविक संगीत।

भारतीय प्रशंसकों के लिए इसका क्या मतलब है

भारत में K-pop अब केवल एक सीमित फैन-कम्युनिटी की चीज़ नहीं रहा। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, कोरियाई संगीत, ड्रामा, फैशन और ब्यूटी संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ी है। सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म और फैन-इवेंट्स ने इसे और व्यापक किया है। ऐसे में जब कोई समूह MEOVV जैसी स्पष्ट छवि-परिवर्तन के साथ लौटता है, तो भारतीय दर्शक उसे सिर्फ विदेशी मनोरंजन के रूप में नहीं देखते; वे उसके पीछे की रचनात्मक रणनीति, दृश्य नाटकीयता और आत्म-निर्माण की प्रक्रिया को भी पढ़ते हैं।

भारतीय युवा दर्शक खास तौर पर उन समूहों की ओर आकर्षित होते हैं जिनमें प्रदर्शन-ऊर्जा प्रबल हो, धुन याद रह जाए और दृश्य भाषा प्रभावशाली हो। ‘DDI RO RI’ जैसा शीर्षक इसी कारण भारतीय सोशल मीडिया पर भी जल्दी पकड़ बना सकता है, क्योंकि उसका उच्चारण सरल, दोहराव वाला और लयात्मक है। K-pop की यही खूबी है कि वह भाषा की सीमाओं को ध्वनि, भाव और दृश्य के जरिए पार कर जाता है।

साथ ही, MEOVV का यह नया कमबैक उस बड़ी बहस से भी जुड़ता है जो आज वैश्विक पॉप संस्कृति में चल रही है—क्या कलाकार अपनी छवि खुद गढ़ते हैं, या उन्हें कंपनियां गढ़ती हैं? इस एल्बम में टेडी जैसे निर्माता की भूमिका और सदस्यीय लेखन-भागीदारी का मेल इस सवाल का एक संतुलित उत्तर पेश करता है। भारतीय श्रोता, जो अब स्वतंत्र संगीत, स्व-लिखित गीतों और निजी अभिव्यक्ति को ज्यादा महत्व देने लगे हैं, इस पहलू को विशेष रुचि से देख सकते हैं।

एक और बात जो भारतीय पाठकों के लिए प्रासंगिक है, वह है ‘इवोल्यूशन’ यानी विकास की कथा। भारतीय मनोरंजन में दर्शक अक्सर कलाकारों से यह अपेक्षा करते हैं कि वे हर नए प्रोजेक्ट में कुछ नया लेकर आएं—नई भूमिका, नया संगीत, नई ऊर्जा। MEOVV ने भी इसी सार्वभौमिक अपेक्षा को समझा है। उन्होंने यह नहीं कहा कि वे सिर्फ बेहतर गाना लेकर आए हैं; उन्होंने कहा कि वे बदले हैं। यह बदलाव ही उनकी कहानी का केंद्र है।

अगर आने वाले हफ्तों में यह गीत मंच, चार्ट और सोशल मीडिया पर मजबूत प्रतिक्रिया पाता है, तो MEOVV का यह कमबैक उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। और यदि प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर तक न भी पहुंचे, तब भी यह एल्बम एक महत्वपूर्ण संकेत रहेगा कि समूह सुरक्षित विकल्पों के बजाय अधिक जोखिमपूर्ण, यादगार और आत्मविश्वासी दिशा में बढ़ना चाहता है। K-pop की दुनिया में कई बार यही साहस आगे जाकर पहचान की असली नींव बनता है।

निष्कर्ष: MEOVV की वापसी का असली अर्थ

MEOVV की नई वापसी को केवल एक और K-pop रिलीज़ मानना इस कहानी को छोटा कर देना होगा। यहां एक समूह अपनी सार्वजनिक छवि की नई परिभाषा लिखने की कोशिश कर रहा है। उसने आठ महीने के अंतराल के बाद एक ऐसा मिनी एल्बम चुना है जो उसके व्यक्तित्व को व्यापक तरीके से सामने लाए। उसने शीर्षक गीत के लिए क्लासिकल विरासत और आधुनिक पॉप हुक का मेल चुना है। उसने उद्योग के बड़े निर्माता के अनुभव के साथ सदस्यों की रचनात्मक भागीदारी को जोड़ा है। और सबसे बढ़कर, उसने अपने बदलते रूप को खुद शब्द दिया है—‘बिल्ली’ से ‘शिकारी’ तक।

भारतीय पाठकों के लिए यह कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यह दिखाती है कि K-pop की सफलता केवल चमकीले वीडियो, सुंदर चेहरों और जटिल नृत्य में नहीं छिपी। उसकी असली ताकत उसके सुविचारित कथानक-निर्माण में है। हर एल्बम एक बयान हो सकता है, हर मंचीय प्रवेश एक प्रतीक, और हर हुक एक रणनीतिक सांस्कृतिक उपकरण। MEOVV का ‘बाइट नाउ’ इसी सोच का ताज़ा उदाहरण है।

अब देखने की बात यह होगी कि यह ‘जंगली ऊर्जा’ मंच और बाजार, दोनों पर कितनी प्रभावी साबित होती है। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि MEOVV ने अपने नए अध्याय की शुरुआत शोर मचाकर नहीं, बल्कि स्पष्टता के साथ की है। और आज के K-pop में स्पष्टता अक्सर सबसे बड़ी शक्ति होती है।

Source: Original Korean article - Trendy News Korea

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